Brief Description
भा. प्र. । म. ख. २ उन्मादा. ; व. से. । उन्मादा. ; ग. नि. चूर्णा. ३ ; वृ. यो. त. तं. ८८ ; यो. चि म. । अ.२)
कुष्ठाश्चगन्धे लवणाजमोदे द्वे जीरके त्रीणि कटूनि पाठा ।
माङ्गल्यपुष्पी च समान्यिमानि सर्वैः समानाञ्च वचां विचूर्ण्य ॥
ब्राह्मीरसेनाखिलमेव भाव्यं वारत्रयं शुष्कमिदं हि चूर्णम् ।
अक्षप्रमाणं मधुना घृतेन लिह्यान्नरः सप्तदिनानि चूर्णम् ॥
सारस्वतमिदं चूर्ण ब्रह्मणा निर्मितं पुरा । हिताय सर्वलोकानां दुर्मेधानाम् विचेतसाम् ।।
एतस्याभ्यासतः पुंसां बुद्धिर्मेधा धृतिः स्मृतिः। सम्पत्ति: कविताशक्तिः प्रवर्धतोत्तरोत्तरम् ॥ ।
कूठ, असगन्ध, सेंधा नमक, अजमोद, सफेद और काला जीरा, सोंठ मिर्च, पीपल, पाठा और
शंखपुष्पी १-१ भाग तथा बच सबके बराबर ले कर चूर्ण बनावें और ब्राह्मीके रसको ३ भावना दे कर सुखा लें।
मात्रा-१ तोला । (व्यवहारिक मात्रा३ माशे।) इसे घी और शहद में मिला कर सेवन करनेसे बुद्धि, मेधा, धृति, स्मृति और कविता शक्तिकी वृद्धि होती है।
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | Ushna veerya |
| Vipaka | Madhura |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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