Brief Description
भा.प्र.म.२४/१४५-१५०
पथ्या विभीतामलकीफलानां शतं क्रमेण द्विगुणाभिवृद्धम् । प्रस्थेन युक्तञ्च पलङ्कषाणां द्रोणे जले संस्थितमेकरात्रम् ॥
अर्द्धावशेषं क्वथितं कषायं भाण्डे पचेत्तत् पुनरेव लोहे । अमूनि वह्नेरवतार्य्य दद्यात् द्रव्याणि संचूर्ण्य पलार्द्धकानि ॥
विडङ्गदन्तीत्रिफलागुडूची- कृष्णात्रिवृन्नागरकोषणानि । यथेष्टचेष्टस्य नरस्य शीघ्रं हिमाम्वुपानानि च भोजनानि ॥
निषेव्यमानो विनिहन्ति रोगान् सगृध्रसीं नूतनखञ्जताञ्च । प्लीहानमुग्रं जठरार्त्तिगुल्मं पाण्डुत्वकण्डुत्वविवातरक्तम् ॥
पथ्यादिको गुग्गुलुरेष नाम्ना ख्यातः क्षितावप्रमितप्रभावः । बलेन नागेन समं मनुष्यं जवेन कुर्य्यात्तुरगेण तुल्यम् ॥
आयुःप्रकर्षं विदधाति चक्षु- र्ब्बलं तथा पुष्टिकरो विषघ्नः । क्षतस्य सन्धानकरो विशेषा- द्रोगेषु शस्तः सकलेषु तज्ज्ञैः ॥
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
|---|
| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | Ushna veerya |
| Vipaka | Madhura |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
|---|
| Disease Factors |
|---|
| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
|---|