Brief Description
भा.प्र.म.२७/९७-१०२
चित्रकं पिप्पलीमूलं यवानिं कारवीं तथा । विडङ्गमजमोदांश्च जीरके सुरदारु च ॥
चवैलासैन्धवं कुष्ठं रास्ना गोक्षुरधान्यकम् । त्रिफलां मुस्तकं व्योषान् त्वगुशीरं यवाग्रजम् ॥
तालीसपत्रं पत्रं च सूक्ष्मचूर्णानि कारयेत् । यावन्त्येतानि चूर्णानि तावन्मात्रं तु गुग्गुलुम् ॥
सम्मर्द्यसर्पिषा गाढं स्निग्धे भाण्डे निधापयेत् । अतो मात्रां प्रयुञ्जीत यथेष्टाहारवानपि ॥
योगराज इति ख्य़ातो योगोयममृतोपमः । अग्निमान्द्यामवातादीन् क्रिमिदुष्टवृणानपि ॥
प्लीहगुल्मोदरानाह दुर्नामानि विनाशयेत् अग्निञ्च कुरुते दीप्तं तेजोवृद्धिं बलं तथा ॥
वातरोगान् जयत्येषः सन्धिमज्जागतानपि ॥
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | Ushna veerya |
| Vipaka | Madhura |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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