Brief Description
भा.प्र.म.२९/१७७-१८३
प्रस्थमेकं गुडूच्याश्च अर्धप्रस्थं च गुग्गुलोः । प्रत्येकं त्रिफलायास्तु तत्प्रमाणं विनिर्दिशेत् ॥
सर्वमेकत्र संकुट्य क्वाथयेत् नल्वणॆम्भसि । पादशेषं परिस्राव्य कषायं ग्राहयेत् भिषक् ॥
पुनः पचेत् कषायं तु यावत् सान्द्रत्वमागतम् । दन्ती व्योषविडङ्गानि गुडूची त्रिफलात्वचः ॥
ततश्चार्धपलं चूर्णं गृह्णीयाच्च प्रति प्रति। कर्षं तु त्रिफालायाश्च सर्वमेकत्र चूर्णयेत् ॥
तस्मिन् सुसिद्ध्ं विज्ञाय कवोष्णे प्रक्षिपेत् बुधः । ततश्चाग्निबलं मत्वा खादेत् कर्षप्रमाणतः ॥
वातरक्तं तथाकुष्ठं गुदजान्यग्निसादनम् । दुष्टवृणं प्रमेहांश्च आमवातं भगन्धरम् ॥
नाड्याढ्यवातं श्वयथुं सर्वानेतान् व्यपोहति ॥
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
|---|
| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | Ushna veerya |
| Vipaka | Madhura |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
|---|
| Disease Factors |
|---|
| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
|---|