Brief Description
भा.प्र.म.२९/१८३-१९०
त्रिप्रस्थममृतायाश्च प्रस्थमेकन्तु गुग्गुलोः । प्रत्येकं त्रिफलाप्रस्थं वर्षाभूप्रस्थमेव च ॥
सर्वमेकत्र संकुट्य साधयेन्नल्वणेम्भसि । पुनः पचेत्पादशेषं यावत्स्आन्द्रत्वमागतम् ॥
दन्तीचित्रकमूलानां कणाविश्वफलत्रिकम् । गुडूचित्वग्विडङ्गानां प्रत्येकार्धपलं मतम् ॥
त्रिवृताकर्षमेकन्तु सर्वमेकत्रचूर्णयेत् । सिद्धे चोष्णेक्षिपेत् तत्र अमृतागुग्गुलुं परम् ॥
अतो यथाबलं खादेदम्लपित्ती विशेषतः । वातरक्तं तथा कुष्ठं गुदजान्यग्निसादनम् ॥
दुष्टवृणं प्रमेहांश्च आमवातं भगन्धरम् नाड्याढ्यवातं श्वयथुं हन्यात् सर्वामयान्स्तथा ॥
अश्विभ्यां निर्मितश्चायममृताख्यो हि गुग्गुलुः । गुडरामठशुण्ठीनां मांसकूष्माण्डयोरपि ॥
गुडूच्या गुग्गुलोश्चैव प्रस्थः षोडशिभिः पलैः ।
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
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| Guna | |
| Veerya | Ushna veerya |
| Vipaka | Madhura |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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