Brief Description
भा.प्र.म.२९/२०३-२१२
वरमहिषलोचनोदरसन्निभवर्णस्य गुग्गुलोः प्रस्थम् प्रक्षिप्य तोयराशौ त्रिफलाञ्च यथोक्तपरिमाणम् ।
द्वात्रिंशच्छिन्नरुहापलानि देयानि यत्नेन विपचेत्तदप्रमत्तो दर्व्या सङ्घट्टयेन्मुहुर्यावत् ॥
अर्द्धक्षयितं तोयं जातं ज्वलनस्य सम्पर्कात् अवतार्य वस्त्रपूतं पुनरपि संसाधयेदयः पात्रे ।
सान्द्रीभूते तस्मिन्नवतार्य हिमोपलप्रख्ये त्रिफलाचूर्णार्द्धपलं त्रिकटोश्चूर्णं षडक्षपरिमाणम् ॥
कृमिरिपुचूर्णार्द्धपलं कर्षं कर्षं त्रिवृद्दन्त्योः पलमेकन्तु गुडूच्या दत्वा सञ्चुर्य यत्नेन ॥
उपयुज्य चानुपानं यूषं क्षीरं सुगन्धि सलिलञ्च इच्छाऽहारविहारी भेषजमुपयुज्य सर्वकालमिदम् ।
तनुरोधी वातशोणितमेकद्वित्र्युल्बणं चिरोत्थमपि भग्ननुतपरिशुष्कं स्फुटितं दीर्णमाजानु यच्चापि ॥
व्रणकासकुष्ठगुल्मश्वयथुं गरपाण्डुमेहांश्च नाशयत्याशु मन्दाग्निञ्च विबन्धं प्रमेहपिडकाश्च नाशयत्याशु ।
सततं निषेव्यमाणः कालवशाद्धन्ति सर्वगदान् अभिभूय जरादोषं करोति कैशोरकं रूपम् ||
प्रत्येकं त्रिफलाप्रस्थो जलञ्चाढकमाढकम् गडवद गग्गलोः पाकः सन्धेयस्तु विशेषतः ।
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
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| Guna | |
| Veerya | Ushna veerya |
| Vipaka | Madhura |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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