Brief Description
भा.प्र.म.२९/२२१
त्रिफलाऽतिविषादारुदार्वी मुस्तापरुषकैः । खदिरासननक्ताह्वगुडूचीनृपपादपैः ॥
भूनिम्बनिम्बकटुकाकलिङ्गकुलकैः समैः । क्वाथं कृत्वा ततः पूतं शृतमष्टगुणेऽम्भसि ॥
गुडूच्यास्तत्र सुकृतं चूर्णमर्धं तु वारिणि । क्षिप्त्वा सुनूतने भाण्डे वासयेद्रजनीगतम् ॥
सोमोपेतेन पूतेन कौशिकं परिभावयेत् । षड्गुणेन तु सप्ताहं शिलाजतुसमन्वितम् ॥
शुक्तस्य तु पलान्यष्टौ समावाप्य विचक्षणः । ताप्यचूर्णं पलञ्चैकं द्वे पले मधुसर्पिषोः ॥
एकीकृत्य समं सर्वं लिह्यात्तु त्रिफलाऽम्बुना । तनुना मुद्गयूषेण जाङ्गलानां रसेन वा ॥
जीर्णेऽजीर्णे तु भुञ्जीत पुराणं शालिषष्टिकम् । यथारोगं यथासात्म्यं रसैर्यूषैश्च संस्कृतैः ॥
त्रिसप्ताहप्रयोगेण वातरक्तं सुदारुणम् | निहन्ति वीर्यतः क्षिप्रं कुष्ठरोगान्व्रणानपि ॥
छिन्नं भिन्नञ्च सन्धत्ते त्रिफलाऽख्यो हि गुग्गुलुः ॥
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
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| Guna | |
| Veerya | Ushna veerya |
| Vipaka | Madhura |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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