Brief Description
अथ सुरा वक्ष्यामः- शिंशपाखदीरयोः सारमादायोत्पाट्य चोत्तमारणीब्राह्मीकोशवतीस्तत्सर्वमेकतः
कषायकल्पेन विपाच्योदकमाददीत मण्डोदकार्थं, किण्वपिष्टमभिषुणुयाच्च यथोक्तम् |
एवं सुराः शालसारादौ न्यग्रोधादावारग्वधादौ च विदध्यात् ||८||सु चि १०
सुराविधानमाह- अथेत्यादि| उत्तमारणी उत्तमकरणी, कोशवती देवदाली| उदकशब्दोऽत्र क्वाथे वर्तते| किण्वपिष्टमभिषुणुयात् सन्दध्यात्, यथोक्तं सूत्रस्थाने विरेचनाधिकारे| कषायकल्पेन विपाच्येति शिंशपाखदिरयोः सारभागद्वयमादाय, एकं च भागमुत्तमारण्यादीनां; कुत एतदिति? साराणां कुष्ठहरत्वात्; तुलामेकां चतुर्भिरुदकद्रोणैरुत्क्वाथ्य द्रोणावशिष्टमवतार्य, किण्वपिष्टयोरासुतीबलवचनेन प्रमाणादिकल्पनम्| विदध्यात् सुरां कुर्यादित्यर्थः||८||
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
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| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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