Brief Description
सू.क.६/१४-२७
चन्दनागुरुणी कुष्ठं तगरं तिलपर्णिकम् |
प्रपौण्डरीकं नलदं सरलं देवदारु च ||१४||
भद्रश्रियं यवफलां भार्गी नीलीं सुगन्धिकाम् |
कालेयकं पद्मकं च मधुकं नागरं जटाम् ||१५||
पुन्नागैलैलवालूनि गैरिकं ध्यामकं बलाम् |
तोयं सर्जरसं मांसीं शतपुष्पां हरेणुकाम् ||१६||
तालीशपत्रं क्षुद्रैलां प्रियङ्गुं सकुटन्नटम् |
शिलापुष्पं सशैलेयं पत्रं कालानुसारिवाम् ||१७||
कटुत्रिकं [३] शीतशिवं काश्मर्यं कटुरोहिणीम् |
सोमराजीमतिविषां पृथ्विकामिन्द्रवारुणीम् [४] ||१८||
उशीरं वरुणं मुस्तं कुस्तुम्बुरु नखं तथा |
श्वेते हरिद्रे स्थौणेयं लाक्षां च लवणानि च ||१९||
कुमुदोत्पलपद्मानि पुष्पं चापि तथाऽर्कजम् |
चम्पकाशोकसुमनस्तिल्वकप्रसवानि च ||२०||
पाटलीशाल्मलीशैलुशिरीषाणां तथैव च |
कुसुमं तृणमूल्याश्च सुरभीसिन्धुवारजम् [५] ||२१||
धवाश्वकर्णपार्थानां पुष्पाणि तिनिशस्य च |
गुग्गुलुं कुङ्कुमं बिम्बीं सर्पाक्षीं गन्धनाकुलीम् ||२२||
एतत् सम्भृत्य सम्भारं सूक्ष्मचूर्णानि कारयेत् |
गोपित्तमधुसर्पिर्भिर्युक्तं शृङ्गे निधापयेत् ||२३||
भग्नस्कन्धं विवृताक्षं मृत्योर्दंष्ट्रान्तरं गतम् |
अनेनागदमुख्येन मनुष्यं पुनराहरेत् ||२४||
एषोऽग्निकल्पं दुर्वारं क्रुद्धस्यामिततेजसः |
विषं नागपतेर्हन्यात् प्रसभं वासुकेरपि ||२५||
महासुगन्धिनामाऽयं पञ्चाशीत्यङ्गसंयुतः |
राजाऽगदानां सर्वेषां राज्ञो हस्ते भवेत् सदा ||२६||
स्नातानुलिप्तस्तु [८] नृपो भवेत् सर्वजनप्रियः |
भ्राजिष्णुतां च लभते शत्रुमध्यगतोऽपि सन् ||२७||
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | Ushna veerya |
| Vipaka | Madhura |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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