Brief Description
भा.प्र.म.५४/६८-७२, यो.र.कुष्ठ
चित्रकं त्रिफला व्योषमजाजी कारवी वचा । सैन्धवातिविषाकुष्ठं चव्यैला च यवासकम् ॥ ६८
विडङ्गान्यजमोदा च मुस्ता चामरदारु च । यावन्त्येतानि सर्वाणि तावन्मानन्तु गुग्गुलोः ॥ ६९
सङ्कुट्य सर्पिषा सार्द्धं गुटिकां कारयेद्भिषक्प्रातर्भोजनकाले च खादेदग्निबलं यथा ॥ ७०
हन्त्यष्टादश कुष्ठानि कृमिदुष्टव्रणानि च । ग्रहण्यर्शोविकारांश्च मुखामयगलग्रहान् ॥ ७१
गृध्रसीमथ भग्नञ्च गुल्मं चापि नियच्छति । व्याधीन्कोष्ठगतांश्चापि जयेद्विष्णुरिवासुरान् ॥ ७२
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
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| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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