Brief Description
Plant known for its nervine and rejuvenation action
कैयदेवनिघण्टु - १. ओषधिवर्ग
वृद्धदारुक आवेगी जोङ्गको जीर्णवालकः ||१५७६||
अन्तःकोटरपुष्पी स्यात् श्यामा महिषवल्लरी |
अजान्त्री च महाश्यामा वेल्लरी दीर्घवालकः ||१५७७||
वृद्धदारुः कटुस्तिक्तः कषायोष्णो रसायनः |
शुक्रायुर्बलमेध्याग्निस्वरकान्तिकरः सरः ||१५७८||
शोफामवातवातास्रवातमेहकफापहः |१५७९|
धन्वन्तरिनिघण्टु - ४. करवीरादिवर्ग
वृद्धदारुक आवेगी जुङ्गको दीर्घवालुकः | वृद्धः कोटरपुष्पी स्यादजान्त्री छगलान्त्र्यपि ||१०५||
वृद्धदारुः कटुस्तिक्तस्तथोष्णः कपवातजित् | श्वयथुकृमिमेहास्रवातोदरहरः परः ||१०६||
मदनपालनिघण्टु - १. अभयादिवर्ग
वृद्धदारुर्महाश्यामा छगली जीर्णवल्कलः | अन्तःकोटरपुष्पी स्यादावेगी छागलान्यपि ||२५५||
वृद्धदारुः कषायोष्णः सरस्तिक्तो रसायनः | वृष्यो वातामवातास्रशोफमेहकफाञ्जयेत् ||२५६||
राजनिघण्टु - ३. गुडूच्यादिवर्ग
वृद्धदारुक आवेगी जुङ्गको दीर्घबालुकः |वृद्धः कोटरपुष्पी स्यादजान्त्री छागलान्त्रिका ||११६||
जीर्णदारु द्वितीया स्याज्जीर्णा फञ्जी सुपुष्पिका | अजरा सूक्ष्मपत्रा च विज्ञेया च षडाह्वया ||११७||
वृद्धदारुद्वयं गौल्यं पिच्छिलं कफवातहृत् |बल्यं कासामदोषघ्नं द्वितीयं स्वल्पवीर्यदम् ||११८||
सोढलनिघण्टु नामसङ्ग्रह (प्रथम भाग) - ४. करवीरादिवर्ग
वृद्धदारक आवेगी जाङ्गको दीर्घबालकः | अन्तःकोटरपुष्पी स्यादजान्त्री छगलान्त्र्यपि ||५३९||
सोढलनिघण्टु गुणसङ्ग्रह (द्वितीय भाग) - ४. करवीरादिवर्ग
वृद्धदारो ग्रहोन्मादपापालक्ष्मीविनाशनः |
अपस्मारामवातघ्नः शोफशूलापहोऽग्निकृत् ||४३५||
बल्यः कण्ठ्योऽस्थिसन्धानकारी वातरुजापहः |
विसूचीप्रतितून्यादिव्याधिघाती रसायनम् ||४३६||
राजवल्लभनिघण्टु - ६. औषधाश्रयपरिच्छेद
रसायनो वृद्धदारः शोथामवातरोगजित् ||१०५||
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
|---|
| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
|---|
| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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