Brief Description
सुश्रुतसंहिता - सूत्रस्थानम् - ४४. विरेचनद्रव्यविकल्पविज्ञानीयाध्यायः
व्योषं त्रिजातकं मुस्ता विडङ्गामलके तथा ||५४||
नवैतानि समांशानि त्रिवृदष्टगुणानि वै | श्लक्ष्णचूर्णीकृतानीह दन्तीभागद्वयं तथा ||५५||
सर्वाणि चूर्णितानीह गालितानि विमिश्रयेत् | षड्भिश्च शर्कराभागैरीषत्सैन्धवमाक्षिकैः ||५६||
पिण्डितं भक्षयित्वा तु ततः शीताम्बु पाययेत् | बस्तिरुक्तृड्ज्वरच्छर्दिशोषपाण्डुभ्रमापहम् ||५७||
निर्यन्त्रणमिदं सर्वविषघ्नं तु विरेचनम् | त्रिवृदष्टकसञ्ज्ञोऽयं प्रशस्तः पित्तरोगिणाम् ||५८||
भक्ष्यः क्षीरानुपानो वा पित्तश्लेष्मातुरैर्नरैः | भक्ष्यरूपसधर्मत्वादाढ्येष्वेव विधीयते ||५९||
निबन्धसङ्ग्रह व्याख्या (डल्हण कृत)
व्योषादिशीतविरेचनं दर्शयन्नाह- व्योषमित्यादि| व्योषादीनि प्रसिद्धानि| त्रिवृदष्टगुणानीति त्रिवृदष्टगुणा येषु तानि तथा| ईषत्सैन्धवमाक्षिकैरिति ईषच्छब्दश्चतुर्थांशवाचकः| भक्ष्यो भक्षणीयः| भक्ष्यरूपसधर्मत्वात् भक्ष्यरूपतुल्यादित्यर्थः‘वातश्लेष्मातुरैर्नरैः’ इति केचित् पठन्ति||५४-५९||
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | विरेचकम् (Virechaka - Purgative) |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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