Brief Description
तालीसं पद्मकं मांसी हरेण्वगरुचन्दनम्|
हरिद्रे पद्मबीजानि सोशीरं मधुकं च तैः|
पक्वं सद्योव्रणेषूक्तं तैलं रोपणमुत्तमम्||२१||
एवं घृष्टादीनां चिकित्सां पृथक् पृथगुक्त्वा सर्वं सद्योव्रणसाधारणं रोपणतैलमाह-तालीसादिभिः पक्वं तैलं सद्योव्रणेषूत्तमं रोपणमुक्तमाचार्यैः|| २१||
तालीसपत्र, पद्माक, जटामांसी, रेणुका (संभालुके बीज), अगर, चन्दन, हल्दी, दारुहल्दी, कमलगट्टा, खस और मुलैठी। समान भाग लेकर इनके कल्क और इन्हीके क्वाथसे तैल पकाकर रखिए। इसे व्रण (घाव)में लगानेसे धाव भर आता है। (काथके लिए प्रत्येक औषधि ४ तो०; पानी ४ सेर ३२ तो., शेष १ सेर ८ तोले । तैल २२ तोले । कल्कके लिए प्रत्येक वस्तु आधा तोला ।)
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
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| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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