Brief Description
सोढलनिघण्टु - नामसङ्ग्रह (प्रथम भाग) - विषयसंग्रह
चन्दनं कुङ्कमोशीरप्रियङ्गुत्रुटिरोचनाः | तुरुष्कागुरुकस्तूरीकर्पूरा जातिपत्रिका ॥ ६१
जातीकङ्कोलपूगानां लवङ्गस्य फलानि च । नलिका नलदं कुष्ठं हरेणु तगरं प्लवम् ॥ ६२
नवव्याघ्रनखं स्पृक्का बोलं दमनकं तथा ॥ स्थौणेयकं चोरकञ्च शैलेयं सैलवालुकम् ॥ ६३
सरलं सप्तपर्णञ्च लाक्षा तामलकी तथा ॥ लामज्जकं पद्मकञ्च धातक्याः कुसुमानि च ॥ ६४
प्रपौण्डरीकं कर्चूरं समांशैः शाणमात्रकैः । महासुगन्धमित्येतत्तैलप्रस्थेन साधयेत् ॥६५
प्रस्वेदजलदौर्गन्ध्यकण्डूकुष्ठहरं परम् ॥ अनेनाभ्यक्तगात्रस्तु वृद्धः सप्ततिकोपि वा ॥ ६६
युवा भवति शुक्राढ्यः स्त्रीणामत्यन्तवल्लभः । सुभगो दर्शनीयश्च गच्छेच्च प्रमदाशतम् ॥ ६७
वन्ध्यापि लभते गर्भं षण्ढोपि पुरुषायते । अपुत्रः पुत्रमाप्नोति जीवेच्च शरदां शतम् ॥६८
कल्क-सफेद चन्दन, केसर, खस, फूलप्रियङ्गु, छोटी इलायची, गोरोचन, शिलारस, अगर, कस्तूरी, कपूर, जावित्री, जायफल, कंकोल, सुपारी, लौंग, नालीका शाक, जटामांसी, ठ, रेणुका, तगर, नागर मोथा, नख, नखी, स्पृक्का, बोल, दौना, मुरामांसी, गठिवन, चोरक, भूमिछरीला, एलवालुक, सरल काष्ठ ( चौड़का बुरादा ), सप्तपर्ण (सतौनेकी छाल), लाख, भुई आमला, लामज्जक (पीली खस), पद्माक, धायके फूल, पुण्डरिया और कचूर । प्रत्येक ५-५ माशे लेकर सबको एकत्र कूट लें।
२ सेर तिल के तेलमें उपरोक्त कल्क और ८ सेर पानी मिलाकर मन्दाग्नि पर पकावें । जब पानी जल जाए तो तेलको छान लें। इस तेलकी मालिशसे स्वेद, मल, शरीरके दुर्गन्ध, खाज और कुष्ठ आदिका नाश तथा सौन्दर्य को वृद्धि होती है एवं सत्तर वर्षका वृद्ध भी युवाके समान सुन्दर और वीर्यवान हो जाता है । वन्ध्या स्त्री इसके प्रभावसे गर्भ धारण करनेमें समर्थ हो जाती है और नपुंसक पुरुषमें पुरुषत्व आ जाता है तथा पुत्रहीन को दीर्घ जीवी पुत्रको प्राप्ति होती है।
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
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| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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