Brief Description
अ.सं.सू.१६/२२, अ.हृ.सू.१५/४१-४२, सु.सू.३८/४८-४९
न्यग्रोध पिप्पल सदाफल लोध्रयुग्म जम्बूद्वयार्जुन कपीतन सोमवल्काः|
प्लक्षाम्र वञ्जुल प्रियाल पलाश नन्दी कोली कदम्ब विरला मधुकं मधूकम्|
न्यग्रोधादिर्गणो व्रण्यः संग्राही भग्नसाधनः| मेदःपित्तास्रतृड्दाहयोनिरोगनिबर्हणः||२२||
न्यग्रोधोदुम्बराश्वत्थ प्लक्ष मधुक कपीतन ककुभाम्रकोशाम्र चोरकपत्र जम्बूद्वय प्रियाल- मधूक रोहिणी वञ्जुल कदम्ब बदरी तिन्दुकी सल्लकी रोध्रसावर रोध्र भल्लातक पलाशा नन्दीवृक्षश्चेति ||४८||
न्यग्रोधादिर्गणो व्रण्यः सङ्ग्राही भग्नसाधकः |
रक्तपित्तहरो दाहमेदोघ्नो योनिदोषहृत् ||४९||
निबन्धसङ्ग्रह व्याख्या (डल्हण कृत)
न्यग्रोधेत्यादि| न्यग्रोधो वटः; उदुम्बरः प्रसिद्धः; अश्वत्थः पिप्पलः; प्लक्षः पर्कटी; मधुकं प्रसिद्धं; कपीतन आम्रातकः; ककुभः अर्जुनः; आम्राः प्रसिद्धः; कोशाम्रः स्वनामख्यातः; चोरकपत्रो लाक्षावृक्षः; जम्बूद्वयमेका राजजम्बूर्बृहत्फला, द्वितीया काकजम्बूः स्वल्पफला, द्वयग्रहणाद्भूमिजम्ब्वास्तृतीयायाः प्रतिषेधः; प्रियालः चारद्रुमः; मधूको गुडपुष्पो ‘महुवा’ इति लोके; रोहिणी कट्फलः; वञ्जुलो वेतसः; कदम्बः प्रसिद्धः; बदरी प्रसिद्धा; तिन्दुकी तिन्दुकवृक्षः, ‘टिम्बरुयणि’ इति लोके; नन्दीवृक्षोऽत्र प्ररोही गर्दभाण्डः ‘पार्श्वपिप्पल’ इति लोके| शेषं प्रसिद्धम्||४८-४९||
सर्वाङ्गसुन्दरी व्याख्या
न्यग्रोधो-वटः| पिप्पलः-आश्वत्थः| सदाफलः-उदुम्बरः| जम्बूद्वयं-एका राजजम्बूर्बृहत्फलाऽन्या ह्रस्वफला काकजम्बूः| अर्जुनः-पार्थः| कपीतनः-कपिचूडो वानीराख्यः| सोमवल्कः-श्वेतसारः खदिरः| प्लक्षः-शृङ्गी प्लवाख्यः| आम्रः-चूतः| वञ्जुलो-वेतसः| पियालो-द्राक्षारसप्रियः खरस्कन्धाख्यः| नन्दी-जयवृक्षः| कोली-बदरी| विरला-तिन्दुकी| मधुकं-यष्टी| मधूकं-मधूकपुष्पम्| न्यग्रोधादिरयं सङ्ग्रहणादिगुणयुक्तः| वसन्ततिलकावृत्तम्|
आयुर्वेदरसायनम् व्याख्या
न्यग्रोधादिगणमाह-न्यग्रोधेत्यादि| सदाफलः-उद्रुम्बरः| जम्बूद्वयं-जम्बू राजजम्बूश्च| कपीतनः-आम्रातकः| सोमवल्कः-कट्फलः| पियालः-चारः| नन्दी-नन्दीवृक्षः| कोली-बदरी| विरला-तिन्दुकी| भग्रसाधनो-भन्गसधानकृत्|
सौश्रुतनिघण्टु - २५. न्यग्रोधादिगण
न्यग्रोधश्च वटश्चैव तथा रक्तफलः स्मृतः | क्षीरी वैश्रवणावासः पादपी शृङ्गिरेव च ||२५०||
अश्वत्थः पिप्पलः शृङ्गी चलपर्णो गजाशनः | दीर्घायुश्चैत्यवृक्षश्च बोधिवृक्षश्च शब्दितः ||२५१||
उदुम्बरः स्कन्धफलो हेमदुग्धः सदाफलः | यज्ञयोग्यो जन्तुफलो मतश्चापि वनस्पतिः ||२५२||
प्लक्षः प्लवः सुशीतश्च पिप्परिः शुङ्गिरेव च | अश्वत्थपत्रिका चापि तथा चापि कपीतनः ||२५३||
मधूकः सारिवादौ व्याख्यातः | ककुभोऽर्जुनः सालसारादौ |
आम्रश्च सहकारश्च चूतो मधुकरप्रियः | वसन्तदूतश्च तथा मन्मथः पुष्पमञ्जरी ||२५४||
जम्बूः सुरभिपत्रा च महाजम्बूर्महाफला | सुरभी राजजम्बूश्च महास्कन्धा च कीर्तिता ||२५५||
वेतसी काकजम्बूश्च नादेयी शीतपल्लवा | भ्रमरप्रिया मेघवर्णा द्वितीया जम्बुरुच्यते ||२५६||
प्रियालो बहलत्वक्च चारो द्राक्षाफलस्तथा | मधुराम्लफलश्चैव खरस्कन्धश्च शब्दितः ||२५७||
रोहिणी वल्कसोमश्च सोमवृक्षोऽथ कट्फलः | महात्वक्को रञ्जनश्च महावल्कल एव च ||२५८||
वञ्जुलो वेतसश्चैव नादेयो दीर्घपत्रकः | विदुलो वैदली चैव जलकामो निकुञ्जजः ||२५९||
कदम्बो रोध्रादौ | बदरी कोलिका चैव तथा कर्कटकीफला | स्निग्धपिच्छिलपत्रा च तथा चापि विकण्टका ||२६०||
तिन्दुकी कालसारा च नीलस्कन्धा तथैव च |विस्फूर्जनी विस्फुटनी तथा चार्ष्णितरावणी ||२६१||
न्यग्रोधादिर्गणो व्रण्यः सङ्ग्राही भग्नसाधकः | रक्तपित्तहरो दाहमेदोघ्नो योनिदोषहा ||२६२||
| न्यग्रोध | Ficus benghalensis | वटवृक्ष के छाल | Banyan tree. |
| अश्वत्थ | Ficus religiosa | पीपल के छाल | Peepal, Bot-tree. |
| उदुम्बर | Ficus racemosa | गूलर के छाल | Cluster Fig, Country Fig. |
| शावर लोध्र | Symplocos racemosa | शावर लोध्र | Lodh tree |
| पट्टिका लोध्र | Symplocos paniculata | पट्टिका लोध्र | Sapphire Berry. |
| काकजम्बू | Syzygium cuminii | जामून | Java Plum, Jambolan, Black plum |
| राजजम्बू | Syzygium jambos | गुलाब जामून | Rose Apple. |
| अर्जुन | Terminalia arjuna | अर्जुन छाल | Arjun Terminalia |
| जल वेतस | Salix acmophylla | जलवेतस | brook willow |
| श्वेत खदिर | Acacia suma | सफ़ेद खैर | white Cutch |
| प्लक्ष | Ficus lacor | पिलखन | White Fig. |
| आम्र त्वक् | Mangifera indica | आम | Mango |
| वेतस | Salix caprea | वेतस | Sallow, Goat Willow,Common Willow. |
| प्रियाल | Buchanania lanzan | चिरोंजी | Almondette tree, Cheronjee,Buchanan’s Mango. |
| पलाश | Butea monosperma | धाक, कमरकस,पलाश | Flame of the Forest, Butea Gum, Bengal Kino. |
| नन्दी वृक्ष / पारीष | Thespesia populnea | पारस पीपल | Portia tree, Tulip tree,Umbrella tree, False Rosewood. |
| बदरी | Ziziphus jujuba | उन्नाव | red date, Chinese date, and Chinese jujube, |
| कदम्ब | Anthocephalus cadamba | कदंब | Kadam. |
| तिन्दुकी | Diospyros embryopteris | तेंदू | Gaub Persimmon, Riber Ebony. |
| कोशाम्रम् | Schleichera oleosa | लाख वृक्ष | Lac tree, Macassar Oil tree,Honey tree, Ceylon Oak |
| कट्फल | Myrica nagi | कायफल की छाल | Box Myrtle. |
| शल्लकी | Boswellia serrata | कुन्दुरु, सलायि गुग्गुल | Indian Frankincense, Indian Olibanum |
| भल्लातक | Semecarpus anacardium | भिलावा | Marking-Nut. |
Above mentioned drugs are used for the treatment of Wounds, Ulcers, Fracutres and dislocations, Secretory arrester, obesity, Bleeding diasthesis, diseases with excessive thirst and female reproductive system diseases.
उपर्युक्त औषधियों का उपयोग घाव / व्रण , अस्थिभंग और अस्थिच्युति, स्राव युक्त रोग (अतीसार / प्रतिश्याय / व्रणस्राव आदि) , मोटापा, रक्त स्राव, अत्यधिक प्यास वाले रोग और स्त्री प्रजनन प्रणाली के रोगों के उपचार के लिए किया जाता है।
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
|---|
| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | व्रण रोपण (Vruna Ropana, Wound/Ulcer healing) | न्यग्रोधादि गणम् - Nyagrodhadi Ganam | बहुरूपम् - Bahurupam - Various Forms | अ.सं.सू.१६/२२, अ.हृ.सू.१५/४१-४२, सु.सू.३८/४८-४९ | ||
| 2 | व्रण शोधन (Vruna shodhana, wound cleansing or ulcer debridement medicines)) | न्यग्रोधादि गणम् - Nyagrodhadi Ganam | बहुरूपम् - Bahurupam - Various Forms | अ.सं.सू.१६/२२, अ.हृ.सू.१५/४१-४२, सु.सू.३८/४८-४९ | ||
| 3 | ग्राही - Grahi - Drug action which increases appetite, aids in digestion and dries or desiccates dosha,dhatu and mala | न्यग्रोधादि गणम् - Nyagrodhadi Ganam | बहुरूपम् - Bahurupam - Various Forms | अ.सं.सू.१६/२२, अ.हृ.सू.१५/४१-४२, सु.सू.३८/४८-४९ | ||
| 4 | भग्नम् - Bhagnam - Disease spectrum with Bone Fractures and Ligament tears. | न्यग्रोधादि गणम् - Nyagrodhadi Ganam | बहुरूपम् - Bahurupam - Various Forms | अ.सं.सू.१६/२२, अ.हृ.सू.१५/४१-४२, सु.सू.३८/४८-४९ | ||
| 5 | मेदज व्य़ाधि (Medaja vyadhi, diseases associat | न्यग्रोधादि गणम् - Nyagrodhadi Ganam | बहुरूपम् - Bahurupam - Various Forms | अ.सं.सू.१६/२२, अ.हृ.सू.१५/४१-४२, सु.सू.३८/४८-४९ | ||
| 6 | तृष्णा / पिपासा / तृषा / तर्षणम् - Trishna / Pipasa / Trusha / Tarshana - Disease spectrum with excessive Thirst - Polydipsia | न्यग्रोधादि गणम् - Nyagrodhadi Ganam | बहुरूपम् - Bahurupam - Various Forms | अ.सं.सू.१६/२२, अ.हृ.सू.१५/४१-४२, सु.सू.३८/४८-४९ | ||
| 7 | रक्तपित्तम् (Raktapittam, Disease spectrum with uncontrolled bleeding from the body- Bleeding diathesis) | न्यग्रोधादि गणम् - Nyagrodhadi Ganam | बहुरूपम् - Bahurupam - Various Forms | अ.सं.सू.१६/२२, अ.हृ.सू.१५/४१-४२, सु.सू.३८/४८-४९ | ||
| 8 | दाहः - Daha - Burning parasthesia | न्यग्रोधादि गणम् - Nyagrodhadi Ganam | बहुरूपम् - Bahurupam - Various Forms | अ.सं.सू.१६/२२, अ.हृ.सू.१५/४१-४२, सु.सू.३८/४८-४९ | ||
| 9 | योनिरोगम् (Yonirogam) | न्यग्रोधादि गणम् - Nyagrodhadi Ganam | बहुरूपम् - Bahurupam - Various Forms | अ.सं.सू.१६/२२, अ.हृ.सू.१५/४१-४२, सु.सू.३८/४८-४९ |
| Disease Factors |
|---|
| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
|---|