Brief Description
(हा. सं. । स्था. ३ अ. २३)
भागाश्चाष्टौ बलामूलं चत्वारो दशमूलकम् ।
क्वाथश्चतुर्गुणे तोयेऽथवा द्रोणस्य संख्यया ।
तत्राढकं क्षिपेत् क्षीरमाढकं मिश्रयेद्दधि ।
आढकं माषकुल्माषयूषं पर्युषितं क्षिपेत् ।।
तैलं तिलानां द्रोणं तु कटाहे पाचयेच्छनैः ।
जीवन्ती जीवनीया च काकोल्यो जीवकर्षभौ।।
मेदे वे सरलं दारु शल्लकञ्च कुचन्दनम् ।
कालीयकं सर्जरसं मञ्जिष्ठा त्रिसुगन्धिकम् ।।
मांसी शैलेयकं कुष्ठं वचा कालानुसारिवा ।
शतावरी चाश्वगन्धा शतपुष्पा पुनर्नवा ॥
किण्वकं च मुरा मुस्ता तथा तालीसपत्रकम् ।
कटुत्रयं वालकौ च सर्वं तत्र विमिश्रयेत् ।।
सिद्धं सर्वगुणं श्रेष्ठं कृत्वा मङ्गलवाचनम् |
सौवर्णे राजते कुम्भे वाथवा मृण्मयायसे ।
सुगुप्तं धारयित्वा तु पानाभ्यङ्गे निरूहके ।
वस्तौ वापि प्रयोक्तव्यं मनुष्यस्य यथाबलम् ॥
वातार्दितेऽथवा भग्ने भिन्ने वापि प्रदापयेत् ।
या वन्ध्या च भवेन्नारी पुरुषश्चाल्परेतसः ।।
क्षीणो वा दुर्बलो वापि तथा जीर्णज्वरातुरः ।
आमवातातुराणां च तथा पक्षप्रकुश्चके ।।
प्रतानके प्रयोक्तव्यं तथा शुष्के हनुग्रहे ।
कर्णशूले चाक्षिशूले मन्यास्तम्भे च पार्श्वगे ॥
सर्ववातविकाराणां हितं तैलं यथामृतम् ।
हन्ति श्वासं च कासं च गुल्मार्शौ ग्रहणीगदम् ।।
अष्टादशानि कुष्ठानि शीघ्रं वापि नियच्छति ।
ग्रहभूतपिशाचाश्च डाकिनी शाकिनी तथा ॥
दूरदेशे पलायन्ते बलातैलस्य दर्शनात् ।
अपस्मारादिदोषांश्च तच्च दूरे नियच्छति ॥
वृद्धा युवानो भवन्ति बन्ध्या च लभते सुतम् ।
तैलं महाबलाद्यं च महावातहरं स्मृतम् ।।
क्वाथ-(१) खरैटी की जड़ ८ भाग (३२ सेर) लेकर अधकुटा करके २५६ सेर पानीमें पकायें । जब ६४ सेर पानी शेष रह जाय तो छान लें।
(२) ४ भाग (१६ सेर) दशमूलको १२८ सेर पानीमें पकावें । जब ३२ सेर पानी शेष रह जाए तो छान लें।
(३) ४ सेर उड़दको कूटकर ३२ सेर पानीमें पकायें । जब ८ सेर पानी शेष रह जाए तो छान लें।
(४) ४ सेर कुलथीको ३२ सेर पानी में पकावें । जब ८ सेर पानी शेष रहे तो छान लें ।
कल्क-जीवन्ती, हर्र, काकोली, क्षीरकाकोली, जीवक, ऋषभक, मेदा, महामेदा, धूपसरल, देवदारु, शल्लकी (शिलारस), लाल चन्दन, तगर, राल, मजीठ, दालचीनी, इलायची, तेजपात, जटामांसी, भूरिछरीला, कूठ, वच, तगर, शतावर, असगन्ध, सोया, पुनर्नवा (विसखपरा), सुराबीज (किण्व), सुरा, नागरमोथा, तालीसपत्र, सोंठ, मिर्च, पीपल, तथा २ प्रकारको सुगन्धवाला । सब समान भाग--मिश्रित ४ सेर (प्रत्येक ८ तोले) लेकर सबको एकत्र कूट लें।
विधि-३२ सेर तिल के तेल में उपरोक्त चारों क्वाथ, कल्क, और ८-८ सेर दूध तथा दही मिलाकर मन्दाग्नि पर पकायें । जब पानी जल जाय तो तेलको छान लें।
नोट -उड़द और कुलथीका क्वाथ पहले दिन बना कर रख लेना चाहिए और दूसरे दिन तेल पकाना चाहिये। इसे पान, अभ्यंग और निरूण बस्तिमें प्रयुक्त करनेसे अईित और भग्नादि वातज रोग नष्ट होते हैं । वन्ध्या स्त्री और क्षीणवीर्य पुरुषों के लिए यह तैल अत्यन्त हितकारी है।
यह तैल जीर्णज्वर, आमवात, पक्षसंकोच, प्रतानक, शरीरका सूख जाना, हनुग्रह, कर्णशूल, अक्षिशूल, मन्यास्तम्भ, पार्श्व शूल, श्वास, खांसी, गुल्म, अर्श, ग्रहणीदोष, १८ प्रकारके कुष्ठ, अपस्मार और अन्य समस्त वातज रोगांको नष्ट करता है।
इसके प्रभावसे भूत, पिशाच और डाकिनी, शाकिनी इत्यादि दूर भाग जाते हैं एवं वृद्ध पुरुष युवाके समान हो जाते हैं और वन्ध्या स्त्रीको पुत्रकी प्राप्ति होती है।
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
|---|
| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | वातरोगम् /मरुत् रोगम् - Vata Rogam / Marut rogam - Disease spectrum of Movement diseases involving Musculoskeletal and Nervous System | महाबलाद्यं तैलम् (Mahabaladya Tailam) | हा. सं. । स्था. ३ अ. २३ | |||
| 2 | भग्नम् - Bhagnam - Disease spectrum with Bone Fractures and Ligament tears. | महाबलाद्यं तैलम् (Mahabaladya Tailam) | हा. सं. । स्था. ३ अ. २३ | |||
| 3 | अर्दितम् - Arditam - Disease spectrum with Facial paralysis, Bells palsy, Transient ischemic attack, Hemi Paresis | महाबलाद्यं तैलम् (Mahabaladya Tailam) | हा. सं. । स्था. ३ अ. २३ | |||
| 4 | शुक्राल्पत्वम् (Shukaralpatvam, Reduced sperm | महाबलाद्यं तैलम् (Mahabaladya Tailam) | हा. सं. । स्था. ३ अ. २३ | |||
| 5 | वन्ध्या - Vandhya - Female Infertility | महाबलाद्यं तैलम् (Mahabaladya Tailam) | हा. सं. । स्था. ३ अ. २३ | |||
| 6 | धातुक्षयम् - Dhatukshayam - Spectrum of diseases associated with Cachexia or loss of muscle mass | महाबलाद्यं तैलम् (Mahabaladya Tailam) | हा. सं. । स्था. ३ अ. २३ | |||
| 7 | रसायनम् - Rasayana - Drug action which prevents old age and prolongs life with proper nourishment to the body | महाबलाद्यं तैलम् (Mahabaladya Tailam) | हा. सं. । स्था. ३ अ. २३ | |||
| 8 | दारुण वातरोगम् (Daruna Vatarogam) | महाबलाद्यं तैलम् (Mahabaladya Tailam) | हा. सं. । स्था. ३ अ. २३ |
| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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