Brief Description
(र. स. क. । उल्ला. ५)
कस्तूरीन्दुश्च बाह्लीकं नखं मांसी च सर्जकम् । मुस्ताऽगुरु सिता सर्वं क्रमवृद्धं समं पुरम् ॥
स्तोकं स्तोकं क्षिपेत्तैलं दिनैकमथ कुदृयेत् । वर्तिं कुर्यात् प्रदीप्ता सा दिव्यं धूमं विमुञ्चति।।
सर्वदेवप्रियः सर्वमन्त्रसिद्धिप्रदायकः । स्नाने वस्त्रे रतागारे धूपोऽयं राजवल्लभः ॥
कस्तूरी १ भाग, कपूर २ भाग, केसर ३ भाग, नखी ४ भाग, जटामांसी ५ भाग, राल ६ भाग, नागरमोथा ७ भाग, अगर ८ भाग और मिश्री ९ भाग तथा गूगल सबके बराबर ( ४५ भाग) लेकर गूगलके अतिरिक्त सब चीजोंका बारीक चूर्ण बना लें और फिर उसे गूगलमें मिला कर उसमें थोड़ा थोड़ा तेल डालते हुवे दिन भर फूटें । तदनन्तर उसकी बत्तियां बनाकर सुरक्षित रक्खें। इन्हें जलानेसे अत्युत्कृष्ट सुगन्धियुक्त धूम्र निकलता है।
यह धूप सर्व-देवप्रिय और सर्वमन्त्र सिद्धिदायक है। एवं स्नान-जल, वस्त्र तथा रतागारको सुगन्धित करनेके लिये उपयोगी है ।
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
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| Rasa | |
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| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
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| 1 | सुगन्ध धूप (Sugandha Dhupa - Perfume smoke/Agarabatti ) | राजवल्लभधूपः (Rajavallabha Dhupa) | र. स. क. । उल्ला. ५ | |||
| 2 | मन्त्रसिद्धि प्रदायक (Mantrasiddhi Pradyaka - Action which gives power to Hymns) | राजवल्लभधूपः (Rajavallabha Dhupa) | र. स. क. । उल्ला. ५ | |||
| 3 | देवप्रिय धूपः (Devapriya Dhupa -Scented smoke loved by God) | राजवल्लभधूपः (Rajavallabha Dhupa) | र. स. क. । उल्ला. ५ |
| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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