Brief Description
अ.हृ.चि.४/ १० -१३, अ.सं.चि.६/७
अशान्तौ कृतसंशुद्धेर्धूमैर्लीनं मलं हरेत्|
हरिद्रापत्रमेरण्डमूलं लाक्षां मनःशिलाम्||१०|| सदेवदार्वलं मांसीं पिष्ट्वा वर्तिं प्रकल्पयेत्|
तां घृताक्तां पिबेद्धूमं यवान् वा घृतसंयुतान्||११||
मधूच्छिष्टं सर्जरसं घृतं वा गुरु वाऽगुरु| चन्दनं वा तथा शृङ्गं बालान्वा स्नाय्वा वा गवाम्||१२||
ऋक्षगोधकुरङ्गैणचर्मशृङ्गखुराणि वा|
गुग्गुलुं वा मनोह्वां वा शालनिर्यासमेव वा||१३||
शल्लकीं गुग्गुलुं लोहं पद्मकं वा घृताप्लुतम्|
सर्वाङ्गसुन्दरी व्याख्या
स०-हरिद्रादीनि पिष्ट्वा जलेन वर्तिं प्रकल्पयेत्| तां-वर्ति, घृताक्तां कृत्वा धूमं पिबेत्, सामर्थ्यादग्निप्लुष्टाम्| अथवा यवान् घृताक्तान् धूमं पिबेत्| मधूच्छिष्टं-सिक्थकं, सर्जरसं घृतं वा एकीकृत्य धूमं पिबेत्| अथवा, गुरु-श्रेष्ठं, अगुरु कृष्णागरु, धूमं पिबेत्| अथवा, चन्दनम् [ धूमं पिबेत् ]| अथवा, गवां शृङ्गं धूमं पिबेत्| अथवा, गवां वालान्-गलकम्बलजानि रोमणि, धूमं पिबेत्| स्नाव वा-स्नायु वा गवामेव, धूमं पिबेत्| रूक्षादीनां चर्मादीनि वा धूमं पिबेत्| खुरशब्दस्यार्धर्चादित्वान्नपुंसकत्वम्| गुग्गुलुं वा, अथवा मनः शिलां शालनिर्यासं वा धूमं पिबेत्| शल्लक्यादि घृताप्लुतं वा|
आयुर्वेदरसायनम् व्याख्या
आ० र०-धूमानाह
हरिद्रापत्रमिति| [ अत्र ]...दश धूमाः| तत्राद्यः सप्तभिः, तृतीयपञ्चमौ द्वाभ्याम्, नवमस्त्रिभिः, शेषा एकेन (?), सर्वे सघृताः|
शशिलेखा व्याख्या
कृतसंशुद्धेरपि दोषस्याशान्तौ ऋष्यादीनां यानि चर्मादीनि तानि च पृथग्धूमः| ऋश्यो मृगभेदः| सल्लक्यादिकं मिश्रीभूतं घृताप्लुतं धूमः| सल्लकी सुरभिः| (नि)सल्लकी सुरभिर्मोचा महेरुण्यश्वमूत्रिका| लोहमगरु||७||
In Dyspnoea spectrum diseases, when Expulssive or Shodhana line of Treatment fails to expell the liquid dosha, medicated smokes should be used.
Following drug combination Cigars can be used for treatment of disease spectrum with difficult breathing.
1.Turmeric, Tamala Patra, Castor roots, stick Lac, Realger, Himalayan cedar,Yellow orpiment, Jatamamsi roots powdered and Cigar prepared with Ghee and used as Smoke.
2.Barley mixed with Ghee
3.Beewax, White Damar and ghee
4. Oudh or Agar wood
5. Sandal Wood
6. Hairs / Horns /Tendons of Cow
7.Skin/ Horns / Hoof of Bear, Iguana, Deer, Black Deer
8.Guggulu
9.Manashila
10.Shalanityasa
11.Shallaki, Guggulu, Padmaka,and Agar wood mixed with ghee.
श्वास रोगों में, जब निष्कासन या शोधन उपचार तरल दोष को बाहर निकालने में विफल हो जाती है, तो औषधीय धुएं का उपयोग किया जाना चाहिए।
निम्नलिखित द्रव्यसंयोजन के सिगार का उपयोग,सांस लेने में कठिनाई के लक्षण होनेवाले रोगसमूह के उपचार के लिए कराजासक्ता है । 1.हल्दी, तमाल पत्र, अरंडी की जड़,लाख,मनशिला, देवदार,हरताल,जटामासी की जड़ का चूर्ण और घी से तैयार सिगार इस्तेमाल किया जाता है। 2.जौ घी के साथ मिश्रित करके 3.मोम,सर्जरस और घी 4.आगर 5.चंदन 5.गाय के बाल/सींग/कण्डरा 6.भालू , इगुआना, हिरण, काला हिरण इन प्राणियों के त्वचा/सींग/खुर 7.गुग्गुलु 8.मनशीला 9.शालनिर्यास 10.शल्लकी, गुग्गुलु,पद्मक और अगर की चूर्ण में घी मिलाकर।
| Sl.No | Raw Material | Variant | Ratio | Quantity Required for 1000g | Unit |
|---|
| Rasa | |
|---|---|
| Guna | |
| Veerya | |
| Vipaka | |
| Prabhava | |
| Anupanam | modal-content |
| Sl.No. | Disease Factor | Name of the combination | Form of the combination | Reference | Combination products | Procedure |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | श्वासम् - Shvasam - Disease Spectrum with difficulty breathing | श्वासहर धूम प्रयोगम् - 1 - Shvasahara Dhuma Prayogam - 1 | अ.हृ.चि.४/ १० -१३, अ.सं.चि.६/७ | |||
| 2 | हिक्काश्वासे लीनदोषावस्था - Hikkashvase leenadoshavastha | श्वासहर धूम प्रयोगम् - 1 - Shvasahara Dhuma Prayogam - 1 | अ.हृ.चि.४/ १० -१३, अ.सं.चि.६/७ |
| Disease Factors |
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| Type | Operator | Value | Unit | Frequency | Duration | Comment |
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